Author: indrajeet-kaur

indrajeet-kaur

लक्ष्मी घर की बहू होती है

खांसी, छींक, गर्भावस्था की तरह प्रेम को भी छिपाया नहीं जा सकता हैI इस नियम-धरम के तहत कहीं न कहीं से लोकराम को भी अपने बलुआ के परेम के बारे

राजा की ऐनक

सन्तनगर के राजा का खजाना भरा हुआ था। जैसे कि परम्परा है, राजा बड़ा सुखी था। विशाल महल, सोने का सिंहासन, रत्नजड़ित मुकुट, सुन्दर रानियाँ, इनमें से पैदा हुये वंश

ज्यों-ज्यों तबियत बिगड़ने लगी

कार्यक्रम का समय शाम चार बजे का लिखा था कार्ड पर। सम्मान मेरा नहीं होना था, किसी वरिष्ठ रचनाकार का था। वो इतने वरिष्ठ थे कि उनके दस्ते में दो

घासतंत्र और रजुआ

रजुआ। एक घोड़े का नाम था यह। वैसे तो घोड़े को घास से दोस्ती नहीं करनी चाहिए पर इस वाले ने इसने कि घास को नहीं खायेगा। धरती की हरियाली

पुरुष सशक्तिकरण वाया फिल इन द ब्लैंक्स

‘‘गुड मार्निंग सर्रर।’’ “सब लोग शांत…हाँ-हाँ ठीक है। सिट डाउन हो जाओ…।’’ आदेश मिलते ही बच्चे धम्म से अपनी सीट पर बैठ गये। जो खाली बेंच पर किनारे बैठे, वे

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