Author: joshna-banerjee-adwani

joshna-banerjee-adwani

मज़दूर ईश्वर

अनुपस्थितियों को सिखाई सोलह कलाएँ गुनाह के अनेक तथ्य बनाकर प्रायश्चित को मोक्ष दिया, संगीत की लय में प्रेमियों की आत्माओं के लिए गुंजाइश रखी, वचन के साथ बाँध दिया दैनिक

इतना मुश्किल भी नहीं था

इतना मुश्किल भी नही था यादों को बाँध लेना शू लेस के साथ और जॉगिंग करते हुये झाड़ देना मन से झन्न झन्न करते दुखों का कॉलेस्ट्रॉल इतना मुश्किल भी

अलबत्ता प्रेम

ईश्वर ने सोचा यह सुंदर है नदी ने सोचा यह पीछे छूटी स्मृतियों की टीस है पर्वत ने सोचा यह गर्व से नीचे देख पाने की कला है मल्लाह ने

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