Author: lovely-goswami

lovely-goswami

नींद के बारे में

वह मुझसे पहले सोने जाता और मुझसे पहले जागता था मैं अक्सर लिखते-लिखते सिर उठा कर कहती तुम सो जाओ मैं बाद में आकर तुम्हारे पास सो जाऊँगी मैं उसके

बतकही

सुनो, मुझे चूमते हुए तुम हाँ तुम ही मान सको तो मानना प्रेम वह सबसे बड़ा प्रायश्चित है जो मैं तुम्हारे प्रति किये गए अपराधों का कर सकती हूँ मेरा

कविता की असंख्य परिभाषाएँ हैं

तुम्हारे ऊपर सोकर तुम्हें चूमने से पहले मैं अपनी नाक की नोक से तुम्हारी नाक की नोक दबाती हूँ मुझे वह दबाव महसूस होता है जो कविता की पहली पंक्ति

आदतें – जैसी मैंने देखीं

पत्ती काँपकर एक साँस खींचती है फिर गिर जाती है हरापन एक आदत है, बदरंग होकर गिर जाना, एक फ़ैसला। कुछ इच्छाओं को हमने कभी नहीं पहना वे वार्डरोब में

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