Author: yogesh-vyas

yogesh-vyas

बंदिशों का एहसास

आज चल रहे हालात देख कर छिपाकर रखने लगा हूँ अपनी मासूम कविता, ग़ज़ल कहानियों को अपने ही आलेख, व्यंग्य की बुरी नज़रों से दोनों जाये हैं, एक ही कलम

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