बारिश


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~ 1 ~

बारिश की सोंधी महक
ले आई है अपने साथ
उफियों की बारिश

नन्हीं आदि पुलक-पुलक
चुन रही है जैसे —
गिर रहे हैं महुए
या कि
उड़ रहे हैं जैसे —
फूल सरई के

फिर्र-फिर्र-फिर्र…..

~ 2 ~

ये तो अच्छा हुआ
कि दर्द आँखों के रास्ते
बाहर आ
सावन से मिल गया

बारिश की लड़ियों से
मिल गया दर्द
और तोड़ दी कितनी बन्दिशें
पहरे और क़समें।

~ 3 ~

मैं बारिश में थी
और बारिश मुझमें

मेरे पंख भीग रहे थे
देह नदी हो गई थी

शब्द पानी-पानी हो रहे थे
हंसी झरने की तरह
शोर कर रहे थे

बदमाश बादल मेरे पीछे पड़ा था
किसी आवारा शोहदे की तरह

~ 4 ~

मेरे एकान्त को
तोड़ने चली आई है
ये बारिश

घुप्प अन्धेरा अन्दर-बाहर का
कल का खण्डहर होता घर
टिन की चद्दर पर गिरती बून्दें
उदास होता समय है।

ऐसे में बिजली का यूँ
लहरा कर आना, चौंधियाना
बादल की धमकी
और ठनके को संग लाना
तोड़ना मेरे एकान्त को
अच्छा नहीं लगता।

‘Baarish’ Hindi Poems by Vandana Tete

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