आत्महत्या के विरुद्ध

आत्महत्या के विरुद्ध

समय आ गया है जब तब कहता है सम्पादकीय हर बार दस बरस पहले मैं कह चुका होता हूँ कि समय आ गया है। एक ग़रीबी ऊबी, पीली, रोशनी, बीवी

आत्महत्या के विरुद्ध

सूरज अपनी रोशनी समेट रहा था, चाँद आसमान को फाड़ कर बाहर निकल रहा था आसमान पहले से भी ज्यादा गहराता जा रहा था धुंध बेवज़ह घरों से निकल कर

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