Hindagi

इंतजार

इंतजार करना वैसे ही जैसे एक मजदूर दिहाड़ी का करता है रतजगा यात्री प्लेटफार्म पर अपनी ट्रेन का करता है एक याचक अपने हक में फैसले का करता है एक

युद्ध पुत्रियाँ और तितलियाँ

मुझे क्षमा करना मेरे साथी मैं नहीं उगा पाऊँगी उन स्त्रियों को अपनी कविताओं के खेतों में बथुआ और गाजर घास की तरह जो युद्धरत भूमि में धूल पर खून

प्रेम का आध्यात्म

प्रेम होगा नहीं तुम्हे बल्कि खिलेगा जैसे अधमरी टहनियों पर भी बरबस खिल उठते हैं गुँचे सूखी रोटी को देख भूखे बच्चे की चमक उठती है आँखें प्रेम होगा तब

दुर्दिनों का आत्मकथ्य

यातायात संबंधी नियमों में उलझे लोगों के पास नहीं होता तटस्थ रहने के नियम-कायदे समझने भर का समय जीवन के सबसे उदास दिनों में निर्विकल्प झेलनी है एकाकीपन की पीड़ा

केदार जी को स्मरण करते हुए

खेत में चुगते पक्षियों पर कभी मत फेंकना पत्थर नहीं तो भूखा मर जाएगा समूचा आदम जात व्याकुल भटकते निरुपाय को मत देना देहरी से धक्का नहीं तो रोएगा कुत्ता

जड़ें

जड़ें कितनी गहरीं हैं आँकोगी कैसे? फूल से? फल से? छाया से? उसका पता तो इसी से चलेगा आकाश की कितनी ऊँचाई हमने नापी है, धरती पर कितनी दूर तक

प्रेम का डाकिया

कुछ लोग हमारे जीवन में हमें प्रेम करना सिखाने आते हैं वो हमसे प्रेम नहीं करते हैं वो प्रेम के डाकिये होते हैं जो हम तक प्रेम को पहुंचाते हैं

तुम्हें ज्ञात है

तुम्हारी सुगंधि इतनी रमणीय है कि, कोई भी पुष्प, तुम्हारे सम्मुख आने से कतराता है; तुम्हारा सौंदर्य इतना चित्ताकर्षक है, कि देवबालाएँ भी नित्य झेंप खाती हैं; तुम्हारे स्पर्श से

स्वीकारो

विरह के अंतिम क्षणों में कहे गए शब्द, शरीर की प्रत्येक शाखाओं में विक्षोभ उत्पन्न करते हैं, कुछ को पत्तियों की भाँति टूट जाने का अवसर मिलता है, कुछ को

तुम्हारा दुःख

जो मेरे हिस्से का नहीं था, एक मात्र वही था,  सुख का कारण; हिस्से में आयी हुई चीज में, दुःख, सदैव छिपा रहता है, दुःख छिपे रहने की चीज है,

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