poetry

अंत तक बचाए रखना

फूल तोड़कर तुम्हारे बालों में खोंस देना प्रेम नहीं है। पौधे में फूल को, तुम्हारे बालों के लिए अंत तक बचाए रखना प्रेम है। तुमसे इश्क़ का इज़हार कर देना

कविताएँ जब अचानक मर जाती हैं

कविताएँ जब अचानक मर जाती हैं जैसे धकेल दिया गया हो किसी ऊँची पहाड़ी से या कर दिया गया हो उसे छिन्न भिन्न आनन फानन में सारे सबूत मिटा दिए

पृथ्वी की उथल पुथल

प्रतीत होता है मैंने निगल ली है एक समूची पृथ्वी जिसके झरनें बह रहे हैं मेरी रक्तकणिकाओं में जिसके पेड़ उग रहे हैं असंख्य भाव रूपी, जिसके पुष्प खिल रहे

आलाप में गिरह

जाने कितनी बार टूटी लय जाने कितनी बार जोड़े सुर हर आलाप में गिरह पड़ी है कभी दौड़ पड़े तो थकान नहीं और कभी बैठे-बैठे ही ढह गए मुक़ाबले में

प्रेम

प्रेम गहरा होता गया इतना गहरा की अलग होने का डर घर कर गया डर के घर में उम्मीद, अपेक्षा, प्रत्याशा की खिड़कियां हुईं बंदिशों के दरवाज़े में फ़िक्र ने

नदी के तीरे

किशोरवय बेटा पूछता है अक्सर! कैसे देख लेती हो बिन देखे कैसे सुन लेती हो परिधि के बाहर कैसे झाँक लेती हो मेरे भीतर पिता तो देखकर भी अनदेखा सुनकर

रेजा

रेजा को स्वप्न में भी दिखाई देते हैं बड़े-बड़े पत्थर भूरे-लाल, काले-पीले, सफेद रंग के पत्थर, नादान रेजा यह नहीं जानती कि इन पत्थरों से बनेगा लालकिला या ताजमहल बुलंद

शून्य

होने का हर्ष ना होने का शोक मिलन की मुस्कान बिछड़न की मायूसी हँसने का सुख रोने का दुःख पाने की चाहत खोने की वेदना बाहर की प्रीति भीतर की

लोकतंत्र

खरगोश बाघों को बेचता था फिर अपना पेट भरता था बिके बाघ खरीदारों को खा गये फिर बिकने बाजार में आ गये। anamika-anu

टिकुला

एक जोड़े में दो टिकुला, झरोखे के पास, पेड़ से लटका। मंजर, मिठास, भँवरे मिले, फल लगा, टिकुला हरा। मन में खिजां रस, नज़र बचाकर झुरमुट बीच बढ़ा, अप्रैल की

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